सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग हुसेनी बंगाल 17 (गायन समय पहर दिन चढ़े, चंद्रोदय ग्रन्थ के मतानुसार) २४9. (फारसी) अनन्यता । त्रिताल है दाना है दाना, दिलदार मेरे कान्हा। तूँ ही मेरे जान जिगर, यार मेरे खाना ॥ टेक॥ तूँ ही मेरे मादर पिदर, आलम बेगाना। साहिब शिरताज मेरे, तूँ ही सुलताना ॥ 1 ॥ दोस्त दिल तूँ ही मेरे, किसका खिल खाना। नूर चश्म जिंद मेरे, तूँ ही रहमाना ॥ 2 ॥ एकै असनाव मेरे, तूँ ही हम जाना। जानिबा अजीज मेरे, खूब खजाना ॥ 3 ॥ नेक नजर मेहर मीरां, बंदा मैं तेरा।
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