सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
पृष्ठ 427, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 427
श्री दादूवाणी-राग हुसैनी बंगाल 17 दादू दरबार तेरे, खूब साहिब मेरा ॥ 4 ॥ २१०. विनय । त्रिताल तूँ घर आव सुलक्षण पीव । हिक तिल मुख दिखलावहु तेरा, क्या तरसावै जीव ॥ टेक ॥ निशदिन तेरा पंथ निहारूं, तूँ घर मेरे आव । हिरदा भीतर हेत सौं रे वाल्हा, तेरा मुख दिखलाव ॥ 1 ॥ वारी फेरी बलि गई रे, शोभित सोइ कपोल । दादू ऊपरि दया करीनें, सुनाइ सुहावे बोल ॥ 2 ॥ इति राग हुसेनी बंगाल सम्पूर्णः ॥ 17 ॥ पद 2 ॥
- 427 -