भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 428, कुल 504 में से

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राग नटनारायण www:dadooram.org अथ राग नट नारायण १४ (गायन समय रात्रि 9 से 12) 291. हित उपदेश । गज ताल ताको काहे न प्राण संभालै । कोटि अपराध कल्प के लागे, मांहि महूरत टालै ॥ टेक ॥ अनेक जन्म के बन्धन बाढ़े, बिन पावक फँध जालै । ऐसो है मन नाम हरी को, कबहुँ दुःख न सालै ॥ चिंतामणि जुगति सौं राखै, ज्यूं जननी सुत पालै । दादू देखु दया करै ऐसी, जन को जाल न रालै ॥ 292. विरह । जय मंगल ताल गोविन्द कबहुँ मिलै पीव मेरा । चरण-कमल क्योंहीं कर देखूं, राखूं नैनहुँ नेरा ॥ टेक ॥ निरखण का मोहि चाव घणेरा, कब मुख देखूं तेरा।

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