सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग गुंड (गौंड) २० (गायन समय वर्षा ऋतु में सब समय, संगीत प्रकाश के मतानुसार) ३12. भक्ति निष्काम । सुरफाख्ता ताल दर्शन दे राम ! दर्शन दे, हौं तो तेरी मुक्ति न माँगूं रे ।। टेक ।। सिद्धि न माँगूं, रिद्धि न माँगूं, तुम्ह ही माँगूं, गोविन्दा ।। 1 ।। जोग न माँगूं, भोग न माँगूं, तुम्ह ही माँगूं, रामजी ।। 2 ।। घर नहीं माँगूं, वन नहीं माँगूं, तुम्ह ही माँगूं, देवजी ।। 3 ।। दादू तुम बिन और न माँगूं, दर्शन माँगूं देहुजी ।। 4 ।। ३1३. विरह विनती । सुरफाख्ता ताल तूँ आपैं ही विचार, तुझ बिन क्यों रहूँ ? मेरे और न दूजा कोइ, दुःख किसको कहूँ ।। टेक ।।
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