सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गुंड(गौंड) 20 मीत हमारा सोइ, आदैं जे पीया । मुझे मिलावै कोइ, वै जीवन जीया ॥ 1 ॥ तेरे नैन दिखाइ, जीऊँ जिस आस रे । सो धन जीवै क्यों, नहीं जिस पास रे ॥ 2 ॥ पिंजर मांहैं प्राण, तुझ बिन जाइसी । जन दादू माँगे मान, कब घर आइसी ॥ 3 ॥ ३14. (गुजराती) सुरफाख्ता ताल हौं जोइ रही रे बाट, तूँ घर आवनें । तारा दर्शन थी सुख होइ, ते तूँ ल्यावनें ॥ टेक ॥ चरण जोवा नें खांत, ते तूँ देखाड़नें । तुझ बिना जीव देइ, दुहेली कामिनी ॥ 1 ॥ नैणें निहारूं बाट, ऊभी चावनी । तूँ अंतर थी ऊरो आव, देही जावनी ॥ 2 ॥ तूँ दया करी घर आव, दासी गाँवनी । जन दादू राम संभाल, बैन सुहाँवनी ॥ 3 ॥ ३15. झपताल पीव देखे बिन क्यों रहूँ, जिय तलफै मेरा । सब सुख आनन्द पाइये, मुख देखूं तेरा ॥ टेक ॥ पीव बिन कैसा जीवना, मोहि चैन न आवै । निर्धन ज्यों धन पाइये, जब दरस दिखावै ॥ 1 ॥ तुम बिन क्यों धीरज धरूं, जो लौं तोहि न पाऊँ । सन्मुख ह्वै सुख दीजिये, बलिहारी जाऊँ ॥ 2 ॥ विरह वियोग न सह सकूँ, कायर घट काचा । पावन परस न पाइये, सुनि साहिब साँचा ॥ 3 ॥
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