भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-कायाबेली ग्रंथ 23

काया माँही मुनिवर मेला, काया माँही आप अकेला । काया माँही जपिये जाप, काया माँही आपै आप ॥ 5 ॥ काया नगर निधान है, माँही कौतिक होइ । दादू सद्गुरु संग ले, भूल पड़े जनि कोइ ॥ 6 ॥

  1. रंगताल काया माँही विषमी बाट, काया माँही औघट घाट। काया माँही पट्टण गाँव, काया माँही उत्तम ठाँव ॥ 1 ॥ काया माँही मण्डप छाजै, काया माँही आप विराजै। काया माँही महल आवास, काया माँही निश्चल बास ॥ 2 ॥ काया माँही राजद्वार, काया माँही बोलणहार। काया माँही भरे भण्डार, काया माँही वस्तु अपार ॥ 3 ॥ काया माँही नौ निधि होइ, काया माँही अठ सिधि सोइ। काया माँही हीरा साल, काया माँही निपजैं लाल ॥ 4 ॥ काया माँही माणिक भरे, काया माँही ले ले धरे। काया माँही रत्न अमोल, काया माँही मोल न तोल ॥ 5 ॥ काया माँही कर्तार है, सो निधि जानै नाँहि। दादू गुरुमुख पाइये, सब कुछ काया मांहि ॥ 6 ॥

  2. वर्णभिन्न ताल काया माँही सब कुछ जाण, काया मांहै लेहु पिछाण। काया माँही बहु विस्तार, काया माँही अनन्त अपार ॥ 1 ॥ काया माँही अगम अगाध, काया माँही निपजे साध। काया माँही कह्या न जाइ, काया माँही रहे ल्यौ लाइ ॥ 2 ॥ काया माँही साधन सार, काया माँही करे विचार। काया माँही अमृत वाणी, काया माँही सारंग प्राणी ॥ 3 ॥

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