सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-कायाबेली ग्रंथ 23 काया माँही रात दिन, उदय अस्त इकतार। दादू पाया परम गुरु, कीया एकंकार ॥ 6 ॥ 357. त्रिताल काया माँही खेल पसारा, काया माँही प्राण अधारा। काया माँही अठारह भारा, काया माँही उपावनहारा ॥ 1 ॥ काया माँही सब वन राइ, काया माँही रहे घर छाइ। काया माँही कंदलि वास, काया माँही है कैलास ॥ 2 ॥ काया माँही तरुवर छाया, काया माँही पंखी माया। काया माँही आदि अनंत, काया माँही है भगवन्त ॥ 3 ॥ काया माँही त्रिभुवन राइ, काया माँही रहे समाइ। काया माँही चौदह भुवन, काया माँही आवागवन ॥ 4 ॥ काया माँही सब ब्रह्मांड, काया माँही हैं नव खण्ड। काया माँही स्वर्ग पयाल, काया माँही आप दयाल ॥ 5 ॥ काया माँही लोक सब, दादू दिये दिखाइ। मनसा वाचा कर्मणा, गुरु बिन लख्या न जाइ ॥ 6 ॥ 358.रंगताल काया माँही सागर सात, काया माँही अविगत नाथ। काया माँही नदिया नीर, काया माँही गहर गंभीर ॥ 1 ॥ काया माँही सरवर पाणी, काया माँही बसै बिनाणी। काया माँही नीर निवान, काया माँही हंस सुजान ॥ 2 ॥ काया माँही गंग तरंग, काया माँही जमुना संग। काया माँही है सरस्वती, काया माँही द्वारावती ॥ 3 ॥ काया माँही काशी स्थान, काया माँही करै स्नान। काया माँही पूजा पाती, काया माँही तीर्थ जाती ॥ 4 ॥
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