सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग ललित 26 (गायन समय प्रातः 3 से 6) ५०7. पराभक्ति । त्रिताल राम तूँ मोरा हौं तोरा, पाइन परत निहोरा ॥ टेक ॥ एकै संगैं वासा, तुम ठाकुर हम दासा ॥ 1 ॥ तन मन तुम कौं देबा, तेज पुंज हम लेबा ॥ 2 ॥ रस माँही रस होइबा, ज्योति स्वरूपी जोइबा ॥ 3 ॥ ब्रह्म जीव का मेला, दादू नूर अकेला ॥ 4 ॥ ५०8. (मराठी) अनन्य शरण । त्रिताल मेरे गृह आव हो गुरु मेरा, मैं बालक सेवक तेरा ॥ टेक ॥ मात पिता तूँ अम्हचा स्वामी, देव हमारे अंतरजामी ॥ 1 ॥
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