सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग ललित 26 अम्हचा सज्जन अम्हचा बँधू, प्राण हमारे अम्हचा जिन्दू ॥ 2 ॥ अम्हचा प्रीतम अम्हचा मेला, अम्हची जीवन आप अकेला ॥ 3 ॥ अम्हचा साथी संग सनेही, राम बिना दुख दादू देही ॥ 4 ॥ ५०९. (गुजराती) हितोपदेश । गजताल वाहला माहरा ! प्रेम भक्ति रस पीजिये, रमिये रमता राम, माहरा वाहला रे । हिरदा कमल में राखिये, उत्तम एहज ठाम, माहरा वाहला रे ॥ टेक ॥ वाहला माहरा ! सतगुरु शरणे अणसरे, साधु समागम थाइ, माहरा वाहला रे । वाणी ब्रह्म बखानिये, आनन्द में दिन जाइ, माहरा वाहला रे ॥ 1 ॥ वाहला माहरा ! आतम अनुभव ऊपजे, ऊपजे ब्रह्म गियान, माहरा वाहला रे । सुख सागर में झूलिये, साचो येह स्नान, माहरा वाहला रे ॥ 2 ॥ वाहला माहरा ! भव बन्धन सब छूटिये, कर्म न लागे कोइ, माहरा वाहला रे । जीवन मुक्ति फल पामिये, अमर अभय पद होइ, माहरा वाहला रे ॥ 3 ॥ वाहला माहरा ! अठ सिधि नौ निधि आँगणे, परम पदारथ चार, माहरा वाहला रे । दादू जन देखे नहीं, रातो सिरजनहार, माहरा वाहला रे ॥ 4 ॥ ५१०. अखंड प्रीति । गजताल हमारो मन माई ! राम नाम रंग रातो । पिव पिव करै पीव को जानै, मगन रहै रस मातो ॥ टेक ॥ सदा सील संतोष सुहावत, चरण कँवल मन बाँधो । हिरदा माँही जतन कर राखूँ, मानों रंक धन लाधो ॥ 1 ॥
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