सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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श्री दादूवाणी-राग ललित 26 प्रेम भक्ति प्रीति हरि जानूं, हरि सेवा सुखदाई । ज्ञान ध्यान मोहन को मेरे, कंप न लागे काई ॥ 2 ॥ संगि सदा हेत हरि लागो, अंगि और नहिं आवे । दादू दीन दयाल दमोदर, सार सुधा रस भावे ॥ 3 ॥ ५11. (फारसी) साहिब सिफत। राज मृगांक ताल महरवान, महरवान! आब बाद खाक आतिश, आदम नीशान ॥ टेक ॥ शीश पाँव हाथ कीये, नैन कीये कान। मुख कीया जीव दीया, राजिक रहमान ॥ 1 ॥ मादर पिदर परदः पोश, सांई सुबहान। संग रहै दस्त गहै, साहिब सुलतान ॥ 2 ॥ या करीम या रहीम, दाना तूँ दीवान। पाक नूर है हजूर, दादू है हैरान ॥ 3 ॥ इति राग ललित सम्पूर्ण ॥ 26 ॥ पद 5 ॥
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