सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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राग जैतश्री अथ राग जैत श्री 27 (गायन समय दिन 3 से 6) 412. अमिट नाम विनती । पंजाबी त्रिताल तेरे नाम की बलि जाऊँ, जहाँ रहूँ जिस ठाऊँ ॥ टेक ॥ तेरे बैनों की बलिहारी, तेरे नैनहुँ ऊपरि वारी । तेरी मूरति की बलि कीती, वारि-वारि हौं दीती ॥ 1 ॥ शोभित नूर तुम्हारा, सुन्दर ज्योति उजारा । मीठा प्राण पियारा, तूं है पीव हमारा ॥ 2 ॥ तेज तुम्हारा कहिये, निर्मल काहे न लहिये । दादू बलि बलि तेरे, आव पिया तूँ मेरे ॥ 3 ॥
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