भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

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श्री दादूवाणी-राग जैत श्री 27

५13. विरह विनती । पंजाबी त्रिताल मेरे जीव की जानै जानराइ, तुमतैं सेवक कहा दुराइ ॥ टेक ॥ जल बिन जैसे जाइ जिय तलफत, तुम्ह बिन तैसे हमहु विहाइ ॥ 1 ॥ तन मन व्याकुल होइ विरहनी, दरश पियासी प्राण जाइ ॥ 2 ॥ जैसे चित्त चकोर चंद मन, ऐसे मोहन हमहि आहि ॥ 3 ॥ विरह अगनि दहत दादू को, दर्शन परसन तनहि सिराइ ॥ 4 ॥ इति राग जैत श्री सम्पूर्ण ॥ 27 ॥ पद 2 ॥

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