सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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राग धनाश्री www.dadooram.org अथ राग धना श्री २४ (गायन समय दिन ३ से ६) ५14. अमिट अविनाशी रंग । धीमा ताल रंग लागो रे राम को, सो रंग कदे न जाई रे । हरि रंग मेरो मन रंग्यो, और न रंग सुहाई रे ।। टेक ।। अविनाशी रंग ऊपनो, रच मच लागो चोलो रे । सो रंग सदा सुहावनो, ऐसो रंग अमोलो रे ।। 1 ।। हरि रंग कदे न ऊतरै, दिन दिन होइ सुरंगो रे । नित नवो निरवाण है, कदे न ह्वैला भंगो रे ।। 2 ।। सांचो रंग सहजैं मिल्यो, सुन्दर रंग अपारो रे । भाग बिना क्यों पाइये, सब रंग मांहीं सारो रे ।। 3 ।। अवरण को का वरणिये, सो रंग सहज स्वरूपो रे ।
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