सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग धना श्री 27 तुम्ह बिन नाथ अनाथ, विरहनि क्यों रहे हो ॥ 1 ॥ पीव के विरह वियोग, तन की सुधि नहीं हो। तलफि तलफि जीव जाइ, मृतक ह्वै रही हो ॥ 2 ॥ दुखित भई हम नारि, कब हरि आवे हो । तुम्ह बिन प्राण अधार, जीव दुख पावे हो ॥ 3 ॥ प्रगटहु दीनदयाल, विलम्ब न कीजिये हो । दादू दुखी बेहाल, दरसन दीजिये हो ॥ 4 ॥ ५18. रंग ताल सुरजन मेरा वे ! कीहैं पार लहाऊँ। जे सुरजन घर आवै वे, हिक कहाण कहाऊँ ॥ टेक॥ तो बाजैं मेकौं चैन न आवै, ये दुख कींह कहाऊँ। तो बाजैं मेकौं नींद न आवै, अँखियाँ नीर भराऊँ ॥ 1 ॥ जे तूँ मेकौं सुरजन डेवै, सो हौं शीश सहाऊँ। ये जन दादू सुरजन आवै, दरगह सेव कराऊँ ॥ 2 ॥ ५19. रंग ताल मोहन माधव कब मिलै, सकल शिरोमणि राइ। तन मन व्याकुल होत है, दरस दिखाओ आइ ॥ टेक॥ नैन रहे पथ जोवताँ, रोवत रैनि बिहाइ। बाल सनेही कब मिलै, मोपै रह्या न जाइ ॥ 1 ॥ छिन-छिन अंग अनल दहै, हरिजी कब मिलि हैं आइ। अंतरजामी जान कर, मेरे तन की तप्त बुझाइ ॥ 2 ॥ तुम दाता सुख देत हो, हाँ हो सुन दीनदयाल। चाहैं नैन उतावले, हाँ हो कब देखूं लाल ॥ 3 ॥ चरन कमल कब देख हौं, हाँ हो सन्मुख सिरजनहार।
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