भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 487, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 487

श्री दादूवाणी-राग धना श्री 27 तुम्ह बिन नाथ अनाथ, विरहनि क्यों रहे हो ॥ 1 ॥ पीव के विरह वियोग, तन की सुधि नहीं हो। तलफि तलफि जीव जाइ, मृतक ह्वै रही हो ॥ 2 ॥ दुखित भई हम नारि, कब हरि आवे हो । तुम्ह बिन प्राण अधार, जीव दुख पावे हो ॥ 3 ॥ प्रगटहु दीनदयाल, विलम्ब न कीजिये हो । दादू दुखी बेहाल, दरसन दीजिये हो ॥ 4 ॥ ५18. रंग ताल सुरजन मेरा वे ! कीहैं पार लहाऊँ। जे सुरजन घर आवै वे, हिक कहाण कहाऊँ ॥ टेक॥ तो बाजैं मेकौं चैन न आवै, ये दुख कींह कहाऊँ। तो बाजैं मेकौं नींद न आवै, अँखियाँ नीर भराऊँ ॥ 1 ॥ जे तूँ मेकौं सुरजन डेवै, सो हौं शीश सहाऊँ। ये जन दादू सुरजन आवै, दरगह सेव कराऊँ ॥ 2 ॥ ५19. रंग ताल मोहन माधव कब मिलै, सकल शिरोमणि राइ। तन मन व्याकुल होत है, दरस दिखाओ आइ ॥ टेक॥ नैन रहे पथ जोवताँ, रोवत रैनि बिहाइ। बाल सनेही कब मिलै, मोपै रह्या न जाइ ॥ 1 ॥ छिन-छिन अंग अनल दहै, हरिजी कब मिलि हैं आइ। अंतरजामी जान कर, मेरे तन की तप्त बुझाइ ॥ 2 ॥ तुम दाता सुख देत हो, हाँ हो सुन दीनदयाल। चाहैं नैन उतावले, हाँ हो कब देखूं लाल ॥ 3 ॥ चरन कमल कब देख हौं, हाँ हो सन्मुख सिरजनहार।

  • 487 -