सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग धना श्री 27 सांई संग सदा रहौं, हाँ हो तब भाग हमार ॥ 4 ॥ जीवनि मेरी जब मिलै, हाँ हो तब ही सुख होइ । तन मन में तूं ही बसै, हाँ हो कब देखूं सोइ ॥ 5 ॥ तन मन की तूं ही लखै, हाँ हो सुन चतुर सुजान । तुम देखे बिन क्यों रहौं, हाँ हो मोहि लागे बान ॥ 6 ॥ बिन देखे दुख पाइये, हाँ हो इब विलम्ब न लाइ । दादू दरशन कारणैं, हाँ हो सुख दीजे आइ ॥ 7 ॥ ५२०. (सिंधी) वैराग्य । वर्ण भिन्न ताल ये खूहि पयें सब भोग विलासन, तैसेहु वाझौं छत्र सिंहासन ॥ टेक॥ जन तिहुंरा बहिश्त नहिं भावे, लाल पलिंग क्या कीजे । भाहि लगे इह सेज सुखासन, मेकौं देखण दीजे ॥ 1 ॥ बैकुंठ मुक्ति स्वर्ग क्या कीजे, सकल भुवन नहिं भावे । भठी पयें सब मंडप छाजे, जे घर कंत न आवे ॥ 2 ॥ लोक अनंत अभै क्या कीजे, मैं विरहीजन तेरा । दादू दरशन देखण दीजे, ये सुन साहिब मेरा ॥ 3 ॥ ५२१. (फारसी) ईमान साबित । (राग काफी) राज मृगांक ताल अल्लह आशिकाँ ईमान, बहिश्त दोजख दीन दुनियां, चे कारे रहमान ॥ टेक॥ मीर मीरी पीर पीरी, फरिश्तः फरमान । आब आतिश अर्श कुर्सी, दीदनी दीवान ॥ 1 ॥ हरदो आलम खलक खाना, मोमिना इसलाम । हजां हाजी क़ज़ा क़ाज़ी, खान तूं सुलतान ॥ 2 ॥ इल्म आलम मुल्क मालुम, हाजते हैरान । अजब यारां खबरदारां, सूरते सुबहान ॥ 3 ॥
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