सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 मध्य मार्ग ना घर भला न वन भला, जहाँ नहीं निज नाँव। दादू उनमनी मन रहै, भला तो सोई ठाँव ॥ 78 ॥ निर्गुण नाम महिमा महात्तम दादू निर्गुणं नामं मई, हृदय भाव प्रवर्तितम्। भ्रमं कर्म किल्विषं, माया मोहं कंपितम् ॥ 79 ॥ कालं जालं सोचितं, भयानक यम किंकरम्। हर्षं मुदितं सदगुरुं, दादू अविगत दर्शनम् ॥ 80 ॥ भगवद् दर्शन का अनुपम माहात्म्य दादू सब सुख स्वर्ग पयाल के, तोल तराजू बाहि। हरि सुख एक पलक का, ता सम कह्या न जाहि ॥ 81 ॥ स्मरण नाम पारिख लक्षण दादू राम नाम सब को कहै, कहिबे बहुत विवेक। एक अनेकों फिर मिले, एक समाना एक ॥ 82 ॥ स्थूल रीति से राम-नाम स्मरण में भेद दादू अपणी अपणी हद में, सब कोई लेवे नाउँ। जे लागे बेहद सौं, तिन की मैं बलि जाउँ ॥ 83 ॥ स्मरण नाम अगाधता कौण पटंतर दीजिये, दूजा नाहीं कोइ। राम सरीखा राम है, सुमिऱ्यां ही सुख होइ ॥ 84 ॥ अपणी जाणै आप गति, और न जाणै कोइ। सुमरि सुमरि रस पीजिये, दादू आनन्द होइ ॥ 85 ॥ करणी बिना कथणी दादू सबही वेद पुराण पढ़ि, नेटि नाम निर्धार। सब कुछ इन ही मांहि है, क्या करिये विस्तार ॥ 86 ॥
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