भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 48

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 है सो सुमिरण होत नहीं, नहीं सो कीजै काम । दादू यहु तन यूँ गया, क्यूँ कर पड्ये राम ॥ 68 ॥ स्मरण नाम महिमा माहात्म्य दादू राम नाम निज मोहनी, जिन मोहे करतार । सुर नर शंकर मुनि जना, ब्रह्मा सृष्टि विचार ॥ 69 ॥ दादू राम नाम निज औषधि, काटै कोटि विकार । विषम व्याधि थैं ऊबरै, काया कंचन सार ॥ 70 ॥ दादू निर्विकार निज नांव ले, जीवन इहै उपाय । दादू कृत्रिम काल है, ताके निकट न जाय ॥ 71 ॥ स्मरण मन पवना गहि सुरति सौं, दादू पावै स्वाद । सुमिरण माहिं सुख घणा, छाड़ि देहु बकवाद ॥ 72 ॥ माया प्रपंच का त्याग नाम सपीड़ा लीजिए, प्रेम भगति गुण गाइ । दादू सुमिरण प्रीति सौं, हेत सहित ल्यौ लाइ ॥ 73 ॥ लय लगाने की विधि प्राण कवल मुख राम कहि, मन पवना मुख राम । दादू सुरति मुख राम कहि, ब्रह्म शून्य निज ठाम ॥ 74 ॥ दादू कहतां सुणातां राम कह, लेतां देतां राम । खातां पीतां राम कह, आत्म कवल विश्राम ॥ 75 ॥ ज्यूं जल पैसे दूध में, ज्यूं पाणी में लौण । ऐसे आत्माराम सौं, मन हठ साधै कौण ॥ 76 ॥ दादू राम नाम में पैस कर, राम नाम ल्यौ जाइ । यहु इंकत त्रिय लोक में, अनत काहे को जाइ ॥ 77 ॥

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