सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 दादू नीकी बरियां आय कर, राम जप लीन्हां । आत्म साधन सोधि कर, कारज भल कीन्हां ।। 57 ।। दादू अगम वस्तु पानैं पड़ी, राखि मंझि छिपाइ । छिन छिन सोई संभालिए, मत वै बीसर जाइ ।। 58 ।। स्मरण नाम महिमा माहात्म्य दादू उज्जवल निर्मला, हरि रंग राता होइ । काहे दादू पचि मरै, पानी सेती धोइ ।। 59 ।। शरीर सरोवर राम जल, माहीं संजम सार । दादू सहजैं सब गए, मन के मैल विकार ।। 60 ।। दादू रामनाम जलं कृत्वां, स्नानं सदा जितः। तन मन आत्म निर्मलं, पंच-भू पापं गतः ।। 61 ।। दादू उत्तम इन्द्री निग्रहं, मुच्यते माया मनः। परम पुरुष पुरातनं, चिंतते सदा तन ।। 62 ।। दादू सब जग विष भय्या, निर्विष बिरला कोइ । सोई निर्विष होइगा, जाके नाम निरंजन होइ ।। 63 ।। दादू निर्विष नाम सौं, तन मन सहजैं होइ । राम निरोगा करेगा, दूजा नांही कोइ ।। 64 ।। ब्रह्म भक्ति जब उपजै, तब माया भक्ति बिलाइ । दादू निर्मल मल गया, ज्यूँ रवि तिमिर नसाइ ।। 65 ।। मनहर भाँवरि दादू विषय विकार सौं, जब लग मन राता । तब लग चित्त न आवई, त्रिभुवनपति दाता ।। 66 ।। विरह जिज्ञासा दादू क्या जाणों कब होइगा, हरि सुमिरण इक तार । क्या जाणों कब छाड़ि है, यहु मन विषै विकार ।। 67 ।।
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