सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 मन परमोध दादू राम कहे सब रहत है, नखसिख सकल सरीर। राम कहे बिन जात है, समझि मनवां वीर ॥ 47 ॥ दादू राम कहै सब रहत है, लाहा मूल सहेत । राम कहे बिन जात है, मूरख मनवां चेत ॥ 48 ॥ दादू राम कहे सब रहत है, आदि अंति लौं सोइ। राम कहे बिन जात है, यहु मन बहुरि न होइ ॥ 49 ॥ दादू राम कहे सब रहत है, जीव ब्रह्म की लार । राम कहे बिन जात है, रे मन हो होशियार ॥ 50 ॥ परमार्थी हरि भज साफिल जीवना, पर उपकार समाइ। दादू मरणा तहाँ भला, जहाँ पशु पंखी खाइ ॥ 51 ॥ स्मरण दादू राम शब्द मुख ले रहै, पीछे लगा जाइ। मनसा वाचा कर्मना, तिहि तत सहज समाइ ॥ 52 ॥ अब 'तिही तत्त' में समाने की विधि का वर्णन दादू रचि मचि लागे नाम सौं, राते माते होइ। देखेंगे दीदार को, सुख पावेंगे सोइ ॥ 53 ॥ चेतावनी दादू सांई सेवैं सब भले, बुरा न कहिये कोइ । सारों मांही सो बुरा, जिस घटि नाम न होइ ॥ 54 ॥ ईश्वर विमुख प्राणी की दुर्गति दादू जियरा राम बिन, दुखिया इहि संसार । उपजै विनसै खप मरै, सुख दुख बारम्बार ॥ 55 ॥ स्मरण नाम महिमा माहात्मय राम नाम रुचि उपजै, लेवे हित चित लाइ। दादू सोई जीयरा, काहे जमपुरि जाइ ॥ 56 ॥
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