भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 स्मरण बिना सांस न ले दादू औसर जीव तैं, कह्या न केवल राम । अंत काल हम कहेंगे, जम बैरी सौं काम ॥ 36 ॥ दादू ऐसे महँगे मोल का, एक सांस जे जाइ । चौदह लोक समान सो, काहे रेत मिलाइ ॥ 37 ॥ अमूल्य श्वास सोई सांस सुजाण नर, सांईं सेती लाइ । कर साटा सिरजनहार सौं, महँगे मोल बिकाइ ॥ 38 ॥ व्यर्थ जीवन जतन करै नहीं जीव का, तन मन पवना फेर। दादू महँगे मोल का, द्वै दोवटी इक सेर ॥ 39 ॥ सफल जीवन दादू रावत राजा राम का, कदे न बिसारै नांव । आत्मराम संभालिये, तो सुबस काया गांव ॥ 40 ॥ स्मरण चितावणी दादू अहर्निशि सदा शरीर में, हरि चिंतत दिन जाइ । प्रेम मगनलै लीन मन, अन्तरगति ल्यौ लाइ ॥ 41 ॥ निमिष एक न्यारा नहीं, तन मन मंझि समाइ । एक अंगि लागा रहै, ताको काल न खाइ ॥ 42 ॥ दादू पिंजर पिंड शरीर का, सुवटा सहज समाइ । रमता सेती रमि रहै, विमल विमल जस गाइ ॥ 43 ॥ अविनाशी सौं एक ह्रै, निमिष न इत उत जाइ । बहुत बिलाई क्या करै, जे हरि हरि शब्द सुणाइ ॥ 44 ॥ दादू जहाँ रहूँ तहँ राम सौं, भावै कंदलि जाइ । भावै गिरि परवत रहूँ, भावै गृह बसाइ ॥ 45 ॥

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