सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 सुमिरण नाम महिमा दादू निमिष न न्यारा कीजिये, अंतर थैं उर नाम। कोटि पतित पावन भये, केवल कहतां राम ॥ 26 ॥ मन प्रबोध दादू जे तैं अब जाण्या नहीं, राम नाम निज सार। फिर पीछै पछिताहिगा, रे मन मूढ गँवार ॥ 27 ॥ दादू राम संभाल ले, जब लग सुखी सरीर। फिरि पीछै पछिताहिगा, जब तन मन धरै न धीर ॥ 28 ॥ दुख दरिया संसार है, सुख का सागर राम। सुख सागर चलि जाइए, दादू तज बेकाम ॥ 29 ॥ दादू दरिया यहु संसार है, तामें राम नाम निज नाव। दादू ढील न कीजिये, यहु औसर यहु डाव ॥ 30 ॥ स्मरण नाम निःसंशय मेरा संसा को नहीं, जीवण मरण का राम। सुपिनैं ही जनि बीसरै, मुख हिरदै हरि नाम ॥ 31 ॥ स्मरण नाम विरह दादू दुखिया तब लगै, जब लग नाम न लेहि। तब ही पावन परम सुख, मेरी जीवनि येहि ॥ 32 ॥ स्मरण नाम पारख लक्षण कछु न कहावे आप को, सांई को सेवे। दादू दूजा छाड़ि सब, नाम निज लेवे ॥ 33 ॥ नाम स्मरण से जीवों के संशय की निवृत्ति जे चित्त चहुँटै राम सौं, सुमिरण मन लागै। दादू आत्मा जीव का, संसा सब भागै ॥ 34 ॥ स्मरण नाम चितावणी दादू पीव का नाम ले, तो मिटै सिर साल। घड़ी मुहूरत चालनां, कैसी आवै काल ॥ 35 ॥
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