भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 दादू एक राम ही टेक गहि, दूजा सहज सुभाइ । राम नाम छाडै नहीं, दूजा आवै जाइ ॥ 16 ॥ दादू राम अगाध है, परिमित नाहीं पार । अवर्ण वर्ण न जाणिये, दादू नाम अधार ॥ 17 ॥ दादू राम अगाध है, अविगत लखै न कोइ । निर्गुण सगुण का कहै, नाम विलम्ब न होइ ॥ 18 ॥ दादू राम अगाध है, बेहद लख्या न जाइ । आदि अंत नहि जाणिये, नाम निरन्तर गाइ ॥ 19 ॥ अद्वैत ब्रह्म दादू राम अगाध है, अकल अगोचर एक। दादू राम विलम्बिए, साधू कहैं अनेक ॥ 20 ॥ दादू एकै अलह राम है, समर्थ सांई सोइ । मैदे के पकवान सब, खातां होइ सु होइ ॥ 21 ॥ निर्गुण सगुण विवाद की निवृत्ति सगुण निर्गुण ह्वै रहै, जैसा है तैसा लीन । हरि सुमिरण ल्यौ लाइए, का जाणों का कीन ॥ 22 ॥ नाम चित्त आवै सो लेय दादू सिरजनहार के, केते नाम अनन्त । चित आवै सो लीजिये, यों साधु सुमरैं संत ॥ 23 ॥ दादू जिन प्राण पिण्ड हमकौ दिया, अंतर सेवैं ताहि । जे आवै ओसण सिर, सोई नांव संवाहि ॥ 24 ॥ चितावणी दादू ऐसा कौण अभागिया, कछु दिढावै और । नाम बिना पग धरन को, कहो कहाँ है ठौर ॥ 25 ॥

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