भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 दादू नीका नांव है, हरि हिरदै न बिसारि । मूरति मन मांहैं बसै, सांसैं सांस संभारि ॥ 5 ॥ सांसैं सांस संभालतां, इक दिन मिलि है आइ । सुमिरण पैंडा सहज का, सतगुरु दिया बताइ ॥ 6 ॥ दादू नीका नांव है, सौ तू हिरदय राखि । पाखंड प्रपंच दूर करि, सुन साधुजन की साखि ॥ 7 ॥ दादू नीका नांव है, आप कहै समझाइ । और आरम्भ सब छाड़ दे, राम नाम ल्यौ लाइ ॥ 8 ॥ राम भजन का सोच क्या, करता होइ सो होइ । दादू राम संभालिये, फिर बुझिये न कोइ ॥ 9 ॥ नाम चेतावनी राम तुम्हारे नांव बिन, जे मुख निकसै और । तो इस अपराधी जीव को, तीन लोक कित ठौर ॥ 10 ॥ छिन-छिन राम संभालतां, जे जीव जाइ तो जाय । आतम के आधार को, नाहीं आन उपाय ॥ 11 ॥ स्मरण माहात्म्य एक मुहूर्त्त मन रहै, नांव निरंजन पास । दादू तब ही देखतां, सकल कर्म का नास ॥ 12 ॥ सहजैं ही सब होइगा, गुण इन्द्रिय का नास । दादू राम संभालतां, कटैं कर्म के पास ॥ 13 ॥ स्मरण नाम चितावनी राम नाम गुरु शब्द सों, रे मन पेलि भरम । निहकर्मी सौं मन मिल्या, दादू काट करम ॥ 14 ॥ एक राम के नाम बिन, जीव की जलन न जाइ । दादू केते पचि मुए, करि-करि बहुत उपाइ ॥ 15 ॥

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