भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग धना श्री 27 साहिब लेखा माँगेगा रे, उत्तर कैसे दीजे ॥ टेक ॥ आगे जाइ पछतावन लागो, पल पल यहु तन छीजे । तातैं जिय समझाइ कहूँ रे, सुकृत अब तैं कीजे ॥ 1 ॥ राम जपत जम काल न लागे, संग रहै जन जीजे । दादू दास भजन कर लीजे, हरि जी की रास रमीजे ॥ 2 ॥ ५30. (गुजराती) काल चेतावनी। प्रति ताल काल काया गढ़ भेलसी, छीजे दशों दुवारो रे । देखतड़ां ते लूटिये, होसी हाहाकारो रे ॥ टेक ॥ नाइक नगर नें मेल्हसी, एकलड़ो ते जाये रे । संग न साथी कोइ न आसी, तहँ को जाणे किम थाये रे ॥ 1 ॥ सत जत साधो माहरा भाईड़ा, कांई सुकृत लीजे सारो रे । मारग विषम चालिबो, कांई लीजे प्राण अधारो रे ॥ 2 ॥ जिमि नीर निवाणा ठाहरे, तिमि साजी बांधो पालो रे । समर्थ सोई सेविये, तो काया न लागे कालो रे ॥ 3 ॥ दादू मन घर आणिये, तो निहचल थिर थाये रे । प्राणी नें पूरो मिलै, तो काया न मेल्ही जाये रे ॥ 4 ॥ ५31. भयभीत भयानक । दीपचन्दी डरिये रे डरिये, परमेश्वर तैं डरिये रे । लेखा लेवै, भर भर देवै, ताथैं बुरा न करिये रे, डरिये ॥ टेक ॥ सांचा लीजी, सांचा दीजी, सांचा सौदा कीजी रे । सांचा राखी, झूठा नाखी, विष ना पीजी रे ॥ 1 ॥ निर्मल गहिये, निर्मल रहिये, निर्मल कहिये रे । निर्मल लीजी, निर्मल दीजी, अनत न बहिये रे ॥ 2 ॥ साहि पठाया, बनिजन आया, जनि डहकावै रे ।

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