सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग धना श्री 27 काल झाल रहे दूर, जीव नहीं काया ॥ 1 ॥ आदि अंत नहीं कोइ, रात दिवस नहीं होइ। उदय अस्त नहीं दोइ, मन ही मन लाया ॥ 2 ॥ अमर गुरु अमर ज्ञान, अमर पुरुष अमर ध्यान। अमर ब्रह्म अमर थान, सहज शून्य आया ॥ 3 ॥ अमर नूर अमर वास, अमर तेज सुख निवास। अमर ज्योति दादू दास, सकल भुवन राया ॥ 4 ॥ ५३९. फरोदस्त ताल राम की राती भई माती, लोक वेद विधि निषेध। भागे सब भ्रम भेद, अमृत रस पीवै ॥ टेक ॥ भागे सब काल झाल, छूटे सब जग जंजाल। विसरे सब हाल चाल, हरि की सुधि पाई ॥ 1 ॥ प्राण पवन जहाँ जाइ, अगम निगम मिले आइ। प्रेम मगन रहे समाइ, विलसै वपु नाँहीं ॥ 2 ॥ परम नूर परम तेज, परम पुंज परम सेज। परम ज्योति परम हेज, सुन्दरि सुख पावै ॥ 3 ॥ परम पुरुष परम रास, परम लाल सुख विलास। परम मंगल दादू दास, पीव सौं मिल खेलै ॥ 4 ॥ ५४० आरती। त्रिताल इहि विधि आरती राम की कीजे, आत्मा अंतर वारणा लीजे ॥ टेक ॥ तन मन चन्दन प्रेम की माला, अनहद घंटा दीन दयाला। ज्ञान का दीपक पवन की बाती, देव निरंजन पाँचों पाती। आनन्द मंगल भाव की सेवा, मनसा मन्दिर आतम देवा। भक्ति निरन्तर मैं बलिहारी, दादू न जानै सेव तुम्हारी।
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