भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग धना श्री 27

४४१. उदीक्षण ताल आरती जगजीवन तेरी, तेरे चरण कँवल पर वारी फेरी ॥ टेक ॥ चित चाँवर हेत हरि ढारे, दीपक ज्ञान हरि ज्योति विचारे ॥ 1 ॥ घंटा शब्द अनाहद बाजे, आनन्द आरती गगन गाजे ॥ 2 ॥ धूप ध्यान हरि सेती कीजे, पुहुप प्रीति हरि भाँवरि लीजे ॥ 3 ॥ सेवा सार आत्मा पूजा, देव निरंजन और न दूजा ॥ 4 ॥ भाव भक्ति सौं आरती कीजे, इहि विधि दादू जुग जुग जीजे ॥ 4 ॥ ४४२. उदीक्षण ताल अविचल आरती देव तुम्हारी, जुग जुग जीवन राम हमारी ॥ टेक ॥ मरण मीच जम काल न लागे, आवागमन सकल भ्रम भागे ॥ 1 ॥ जोनी जीव जनम नहिं आवे, निर्भय नाँव अमर पद पावे ॥ 2 ॥ कलिविष कसमल बँधन कापे, पार पहुँचे थिर कर थापे ॥ 3 ॥ अनेक उधारे तैं जन तारे, दादू आरती नरक निवारे ॥ 4 ॥ ४४३. भंगताल निराकार तेरी आरती, बलि जाऊँ, अनन्त भवन के राइ ॥ टेक ॥ सुर नर सब सेवा करैं, ब्रह्मा विष्णु महेश । देव तुम्हारा भेव न जानैं, पार न पावै शेष ॥ 1 ॥ चन्द सूर आरती करैं, नमो निरंजन देव । धरणि पवन आकाश आराधैं, सबै तुम्हारी सेव ॥ 2 ॥ सकल भवन सेवा करैं, मुनियर सिद्ध समाधि । दीन लीन ह्वै रहे संतजन, अविगत के आराधि ॥ 3 ॥ जै जै जीवनि राम हमारी, भक्ति करैं ल्यौ लाइ । निराकार की आरती कीजै, दादू बलि बलि जाइ ॥ 4 ॥

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