भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-श्री जैमल जी का रामरक्षा मंत्र मुख रक्षा माधो करे, कंठ रक्षा करतार । हृदय रक्षा हरि करे, भुज रक्षा भव तार ॥ 4 ॥ पेट रक्षा पुरषोत्तमा, नाभी त्रिभुवन सार । जंघ रक्षा जगदीशजी, पिण्डी परम उदार ॥ 5 ॥ गिर रक्षा गोविन्द करै, पगथली प्राणअधार । जहां-तहां रक्षा करैं, सांचा सिरजनहार ॥ 6 ॥ आगै राखै रामजी, पीछे राखणहार । बायें दाहिन राखिले, कर गहि तूं करतार ॥ 7 ॥ जम डंका लागे नहीं, विघ्न-काल भय दूर । राम रक्षा जिन की करैं, बाजें अनहद तूर ॥ 8 ॥ भेजी राखै भूधरा, जिह्वा को जगदीश । कलेजा राखै केशवा, अस्थि राखै सब ईश ॥ 9 ॥ मींजी राखै माधवा, मन को मोहन राय । मनसा की रक्षा करै, कबहुँ दूरि न जाय ॥ 10 ॥ आत्मा को अकला राखे, जीव को जोति सरूप । सुरति को राखै साइयां, चित को अमर अनूप ॥ 11 ॥ दिन को राखै रामजी, सूतां राम सहाय । सुपनां ही में संग रहै, जैमल एकै भाय ॥ 12 ॥ सर्प सिंह व्यापैं नहीं, डायन नजर मशाण । अंत काल रक्षा करै, काल न झंपै प्राण ॥ 13 ॥ राख राख शरणागता, हमको अबकी बार । जैमल की रक्षा करो, साचा सिरजनहार ॥ 14 ॥ हरिजी तुम बिन को नहीं, हमको राखणहार । यह जैमल की बीनती, सुनियो बारंबार ॥ 15 ॥

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