भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-श्री जैमल जी का रामरक्षा मंत्र रज्जु मांहि जैसे सर्प भासे,सीपी में रूपौ यथा । मृग तृष्णा का जल बुद्धि देखे, विश्व मिथ्या है तथा ॥ जिनि लह्यो ब्रह्म अखंड पद, अद्वैत सब ही ठाम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 7 ॥ सुन्दर सद्गुरु यों कहें, मुक्त सहज ही होय । या अष्टक तैं भ्रम मिटे, नित्य पढे जे कोय ॥ जो पढे नित्य प्रति ज्ञान अष्टक, मुक्त होय सु सहज ही । संशय न कोउ रहे ताके, दास सुन्दर यों कही ॥ जिनि ह्वै कृपालु अनेक तारे, सकल विधि उद्दाम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 8 ॥ सुन्दर अष्टक सब सरस, तुम जिनि जानऊ आन । अष्टक याही कहे सुने, ताके उपजे ज्ञान ॥ परमेश्वर और परम गुरु, दोऊ एक समान । सुन्दर क हत विशेष यह, गुरु थैं पावे ज्ञान ॥ दादू सद्गुरु के चरण, वंदत सुन्दरदास । जिनकी महिमा कहत हैं, जिनते ज्ञान प्रकाश ॥ श्री जैमल जी का रामरक्षा-मंत्र ॐ राम बिना इस जीव को, कोइ न राखणहार । जैमल सतगुरु आपणा, राखे बारम्बार ॥ 1 ॥ ॐ आकाशे-रक्षा करै, पातालै -प्रतिपाल । घट माँही रक्षा करै, जैमल दीनदयाल ॥ 2 ॥ शीश रक्षा-सांई करै, श्रवणों सिरजनहार । नैन-रक्षा नरहरि करै, नासा अपरम्पार ॥ 3 ॥

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