सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-उपदेश अष्टक जो आय शरण होय प्रापति, ताप तिन तन के हरें । पुनि फेरि बदले घाट उनको, जीव थैं ब्रह्म ही करें ॥ कछू ऊंच नीच न द्रिष्टि जिनके, सकल को विश्राम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ३ ॥ सुन्दर सद्गुरु सहज में, कीये पैली पार । और उपाय न तिर सके, भव सागर संसार ॥ संसार सागर महा दूस्तर, ताहि कहि अब को तिरे । जे कोटि साधन करे कोउ, वृथा ही पच पच मरें ॥ जिनि बिना परिश्रम पार कीये, प्रकट सुख के धाम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ४ ॥ सुन्दर सद्गुरु यों कहें, याही निश्चय आनि । जो कुछ सुनिये देखिये, सर्व स्वप्न कर जानि ॥ जिनि स्वप्न तुल्य दिखाय दीयो, स्वर्ग नर्क उभय कहैं । सुख दुख हर्ष विषाद पुनि, मान अपमान सम गहैं ॥ जिनि जाति कुल अरु वर्ण आश्रम, कहत मिथ्या नाम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ५ ॥ सुन्दर सद्गुरु यों कहें, सत्य कछु नहिं रंच । मिथ्या माया विस्तरी, जे कछु सकल प्रपंच ॥ उपज्यो प्रपंच अनादिको, यह महामाया विस्तरी । नानात्व ह्रै करि जगत भास्यो, बुद्धि सबहिन की हरी ॥ जिनि भ्रम मिटाय दिखाय दीयो, सर्व व्यापक राम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ ६ ॥ सुन्दर सद्गुरु यों कहें, भ्रम ते भासे और । सीपि मांहि रूपौ द्रसे, सर्प रज्जु की ठौर ॥
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