सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-उपदेश अष्टक अखिल विकार विभंजति, मंजति मन नीका । निगमागम नवनीत सौं, गिर प्राकृत टीका ॥ 6 ॥ बम्ह विचार प्रदायिनी, पर वैराग्य प्रदा । सफल करत नर तन को, सोचत सरति सदा ॥ 7 ॥ धारण करत बुद्धि को, बम्हनिष्ठ करती । नारायण निश्चय ही, मुक्ति महल धरती ॥ 8 ॥ उपदेश अष्टक दादू सद्गुरु शीश पर, उरमें जिनको नांव । सुन्दर आये शरण तकि, जिन पायो निज धाम ॥ बहे जात संसार में, सद्गुरु पकरें केश । सुन्दर काढें डूबते, दे अद्भुत उपदेश ॥ उपदेश श्रवण सुनाय अद्भुत, हृदय ज्ञान प्रकाशियो । चिरकाल को अज्ञान पूरण, सकल भ्रम तम नाशियो ॥ आनन्ददायक पुनि सहायक, करत जन निष्काम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 1 ॥ सुन्दर सद्गुरु हाथ में, करडी लई कमान । मार्यो खैंच कसीस कर, बचन लगाया बाण ॥ जिनि बचन बाण लगाय उर में, मृतक फेर जिवाइया । मुख द्वार होय उचार कर, निज सार अमृत पाइया ॥ अत्यन्त कर आनन्द में, हम रहत आठों याम हैं । दादूदयालु प्रसिद्ध सद्गुरु, ताहि मोर प्रणाम हैं ॥ 2 ॥ सुन्दर सद्गुरु जगत में, पर उपकारी होय । नीच ऊंच सब ऊबरैं, शरणे आवै कोय ॥
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