भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 स्मरण नाम चितावणी दादू सिर करवत बहै, बिसरे आत्म राम। मांहि कलेजा काटिये, जीव नहीं विश्राम ॥ 119 ॥ दादू सिर करवत बहै, राम हिरदै थैं जाइ। माँहि कलेजा काटिये, काल दसों दिसी खाइ ॥ 120 ॥ दादू सिर करवत बहै, अंग परस नहीं होइ। मांहि कलेजा काटिये, यहु बिथा न जाणै कोइ ॥ 121 ॥ दादू सिर करवत बहै, नैनहूँ निरखै नांहि। मांहि कलेजा काटिये, साल रह्या मन मांहि ॥ 122 ॥ नाम चिंतन के फलाफल का विवेचन जेता पाप सब जग करै, तैता नाम बिसारे होइ। दादू राम संभालिये, तो येता डारे धोइ ॥ 123 ॥ दादू जब ही राम बिसारिये, तब ही मोटी मार। खंड खंड कर नाखिये, बीज पड़ै तिहिं बार ॥ 124 ॥ दादू जबही राम बिसारिये, तब ही झंपै काल। सिर ऊपर करवत बहै, आइ पड़ै जम जाल ॥ 125 ॥ दादू जब ही राम बिसारिये, तब ही कंध बिनाश। पग पग परलै पिंड पडै, प्राणीजाइ निराश ॥ 126 ॥ दादू जब ही राम बिसारिये, तब ही हाना होइ। प्राण पिंड सर्वस गया, सुखी न देख्या कोइ ॥ 127 ॥ नाम सम्पूर्णता साहिब जी के नांव में, बिरहा पीड़ पुकार। ताला बेली रोवणा, दादू है दीदार ॥ 128 ॥ विरह जागृति स्मरण विधि साहिब जी के नांव में, भाव भगति विश्वास। लै समाधि लागा रहै, दादू सांई पास ॥ 129 ॥

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