भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 साहिब जी के नांव में, मति बुधि ज्ञान विचार। प्रेम प्रीति स्नेह सुख, दादू ज्योति अपार ॥ 130 ॥ साहिब जी के नांव में, सब कुछ भरे भंडार। नूर तेज अनन्त है, दादू सिरजनहार ॥ 131 ॥ जिसमें सब कुछ सो लिया, निरंजन का नांउँ। दादू हिरदै राखिए, मैं बलिहारी जाउँ ॥ 132 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य द्वितीयो स्मरण का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 2 ॥ साखी 132 ॥ दादूराम राम सत्यराम

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