भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 63

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2 सारा सूरा नींद भर, सब कोई सोवै । दादू घायल दर्दवंद, जागै अरु रोवै ॥ 80 ॥ पीड़ पुराणी ना पड़े, जे अन्तर बेध्या होइ । दादू जीवण मरण लौं, पड़या पुकारै सोइ ॥ 81 ॥ दादू बिरही पीड़ सौं, पड़या पुकारै मिंत । राम बिना जीवै नहीं, पीव मिलन की चिंत ॥ 82 ॥ जे कबहूँ विरहनी मरै, तो सुरति विरहनी होइ । दादू पिव पिव जीवतां, मुवा भी टेरे सोइ ॥ 83 ॥ कथनी बिना करणी दादू अपनी पीड़ पुकारिये, पीड़ पराई नांहि । पीड़ पुकारै सो भला, जाके करक कलेजे मांहि ॥ 84 ॥ विरह विलाप ज्यूँ जीवत मृतक कारणै, गत कर नाखै आप । यूँ दादू कारण राम के, विरही करै विलाप ॥ 85 ॥ दादू तलफि तलफि विरहनी मरै, करि करि बहुत बिलाप । विरह अग्नि में जल गई, पीव न पूछै बात ॥ 86 ॥ दादू कहाँ जाऊँ ? कौण पै पुकारूँ ? पीव न पूछै बात । पीव बिन चैन न आवई, क्यों भरूँ दिन रात? ॥ 87 ॥ दादू विरह बियोग न सहि सकूँ, मोपै सह्या न जाइ । कोई कहो मेरे पीव को, दरस दिखावै आइ ॥ 88 ॥ दादू विरह बियोग न सहि सकूँ, निसदिन सालै मोहि । कोई कहो मेरे पीव को, कब मुख देखूँ तोहि ॥ 89 ॥ दादू विरह वियोग न सहि सकूँ, तन मन धरै न धीर । कोई कहो मेरे पीव को, मेटे मेरी पीर ॥ 90 ॥ दादू कहै, साध दुखी संसार में, तुम बिन रह्या न जाइ । औरों के आनन्द है, सुख सौं रैन बिहाइ ॥ 91 ॥

  • 63 -