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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 72, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4 दादू निरंतर पीव पाइया, जहाँ आनन्द बारह मास। हंस सौं परम हंस खेलै, तहँ सेवक स्वामी पास ॥ 5 ॥ दादू रंग भर खेलौं पीव सौं, तहँ बाजै बैन रसाल। अकल पाट पर बैठा स्वामी, प्रेम पिलावै लाल ॥ 6 ॥ दादू रंग भर खेलौं पीव सौं, सेती दीनदयाल। निसवासर नहिं तहँ बसै, मानसरोवर पाल ॥ 7 ॥ दादू रंग भर खेलौं पीव सौं, तहँ कबहुँ न होइ वियोग। आदि पुरुष अन्तर मिल्या, कुछ पूरबले संयोग ॥ 8 ॥ दादू रंग भर खेलौं पीव सौं, तहँ बारह मास बसंत। सेवग सदा आनन्द है, जुग जुग देखूँ कंत ॥ 9 ॥ भगवत् प्राप्ति का स्थान दादू काया अन्तर पाइया, त्रिकुटी केरे तीर। सहजैं आप लखाइया, व्याप्या सकल सरीर ॥ 10 ॥ दादू काया अंतर पाइया, निरन्तर निरधार। सहजैं आप लखाइया, ऐसा समरथ सार ॥ 11 ॥ दादू काया अंतर पाइया, अनहद बैन बजाइ। सहजैं आप लखाइया, शून्य मंडल में जाइ ॥ 12 ॥ दादू काया अंतर पाइया, सब देवन का देव। सहजैं आप लखाइया, ऐसा अलख अभेव ॥ 13 ॥ सुख महिमा और फल दादू भँवर कँवल रस बेधिया, सुख सरवर रस पीव। तहँ हंसा मोती चुणै, पीव देखै सुख जीव ॥ 14 ॥ दादू भँवर कँवल रस बेधिया, गहे चरण कर हेत। पीवजी परसत ही भया, रोम रोम सब श्वेत ॥ 15 ॥ दादू भँवर कँवल रस बेधिया, अनत न भरमै जाइ। तहाँ बास बिलंबिया, मगन भया रस खाइ ॥ 16 ॥

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