सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4 सब तज देखि विचार कर, मेरा नाहीं कोइ। अनुदिन राता राम सौं, भाव भक्ति रत होइ ॥ 141 ॥ दादू अंबर धरती सूर शशि, सांई, सब लै लावै अंग। यश कीरति करुणा करै, तन मन लागा रंग ॥ 142 ॥ दादू परम तेज तहँ मैं गया, नैनहुँ देख्या आइ। सुख संतोष पाया घणा, ज्योतिहिं ज्योति समाइ ॥ 143 ॥ अर्थ चार अस्थान का, गुरु सिष कह्या समझाइ। मारग सिरजनहार का, भाग बड़े सो जाइ ॥ 144 ॥ नमाज सिजदा अरवाहे सिजदा कुनंद, औजूद रा चि कार। दादू नूर दादनी, आसिकां दीदार ॥ 145 ॥ आशिकां रहः कब्ज करदां, दिल वजां रफतंद। अलह आले नूर दीदम, दिल है दादू बंद ॥ 146 ॥ आशिकां मस्ताने आलम, खुरदनी दीदार। चंद दह चिः कार दादू, यारे मां दिलदार ॥ 147 ॥ ब्रह्म साक्षात्कार धारणा दादू दया दयालु की, सो क्यों छानी होइ। प्रेम पुलक मुलकत रहै, सदा सुहागनी सोइ ॥ 148 ॥ दादू बिगसि बिगसि दर्शन करै, पुलकि पुलकि रस पान। मगन गलित माता रहै, अरस परस मिलि प्राण ॥ 149 ॥ दादू देखि देखि सुमिरण करै, देखि देखि लै लीन। देखि देखि तन मन विलै, देखि देखि चित्त दीन ॥ 150 ॥ दादू निरखि निरखि निज नाम ले, निरखि निरखि रस पीव। निरखि निरखि पिव कौं मिलै, निरखि निरखि सुख जीव ॥ 151 ॥
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