सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4 पतिव्रत दादू देख्या एक मन, सो मन सब ही मांहि। तिहि मन सौं मन मानिया, दूजा भावै नांहि ॥ 195 ॥ पुरुष प्रकाशी दादू जिहिं घट दीपक राम का, तिहिं घट तिमिर न होइ। उस उजियारे ज्योति के, सब जग देखै सोइ ॥ 196 ॥ पतिव्रत दादू दिल अरवाह का, सो अपणा ईमान। सोई साबित राखिये, जहँ देखै रहमान ॥ 197 ॥ अल्लह आप ईमान है, दादू के दिल मांहि। सोई साबित राखिये, दूजा कोई नांहि ॥ 198 ॥ प्राण पवन ज्यों पतला, काया करै कमाइ। दादू सब संसार में, क्योंहि गह्या न जाइ ॥ 199 ॥ नूर तेज ज्यों जोति है, प्राण पिंड यो होइ। दृष्टि मुष्टि आवै नहीं, साहिब के वश सोइ ॥ 200 ॥ काया सूक्ष्म कर मिलै, ऐसा कोई एक। दादू आत्म ले मिलैं, ऐसे बहुत अनेक ॥ 201 ॥ सुन्दरी सुहाग आडा आत्म तन धरै, आप रहै ता मांहि। आपण खेलै आप सौं, जीवन सेती नांहि ॥ 202 ॥ अध्यात्म दादू अनभै थैं आनन्द भया, पाया निर्गुण नांव। निश्चल निर्मल निर्वाण पद, अगम अगोचर ठांव ॥ 203 ॥ दादू अनभै वाणी अगम को, ले गई संग लगाइ। अगह गहै, अकह कहै, अभेद भेद लहाइ ॥ 204 ॥ जो कुछ बेद कुरान थैं, अगम अगोचर बात। सो अनभै साचा कहै, यहु दादू अकह कहात ॥ 205 ॥
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