भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4 मिश्री मांही मेल कर, मोल बिकाना बंस। यों दादू महँगा भया, पारब्रह्म मिल हंस ॥ 186 ॥ मीठे मांही राखिये, सो काहे न मीठा होइ। दादू मीठा हाथ ले, रस पीवै सब कोइ ॥ 187 ॥ सत्संगति-कुसंगति मीठे सौं मीठा भया, खारे सौं खारा। दादू ऐसा जीव है, यहु रंग हमारा ॥ 188 ॥ साध महिमा महात्म्य मीठै मीठे कर लिये, मीठा मांही बाहि। दादू मीठा ह्वै रह्या, मीठे मांहि समाहि ॥ 189 ॥ राम बिना किस काम का, नहीं कौड़ी का जीव। सांई सरीखा ह्वै गया, दादू परसै पीव ॥ 190 ॥ पारिख अपारिख हीरा कौड़ी ना लहै, मूरख हाथ गँवार। पाया पारिख जौहरी, दादू मोल अपार ॥ 191 ॥ अंधे हीरा परखिया, कीया कौड़ी मोल। दादू साधू जौहरी, हीरे मोल न तोल ॥ 192 ॥ साध महिमा मीरां कीया महर सौं, परदे थैं लापर्द। राखि लिया दीदार में, दादू भूला दर्द ॥ 193 ॥ दादू नैन बिन देखबा, अंग बिन पेखबा, रसन बिन बोलबा ब्रह्म सेती। श्रवण बिन सुनबा, चरण बिन चालबा, चित्त बिन चिन्तबा, सहज एती ॥ 194 ॥

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