सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4 कहै सब ठौर, गहै सब ठौर, रहै सब ठौर, जोति परवाने । नैन सब ठौर, बैन सब ठौर, ऐन सब ठौर, सोई भल जाने ॥ सीस सब ठौर, श्रवण सब ठौर, चरण सब ठौर, कोई यहु माने । अंग सब ठौर, संग सब ठौर, सबै सब ठौर, दादू ध्याने ॥ 218 ॥ तेज ही कहना, तेज ही गहना, तेज ही रहना सारे । तेज ही बैना, तेज ही नैना, तेज ही ऐन हमारे । तेज ही मेला, तेज ही खेला, तेज अकेला, तेज ही तेज सँवारे । तेज ही लेवे, तेज ही देवे, तेज ही खेवे, तेज ही दादू तारे ॥ 219 ॥ नूर हि का धर, नूर हि का घर, नूर हि का वर मेरा । नूर हि मेला, नूर हि खेला, नूर अकेला, नूर हि मंझ बसेरा । नूर हि का अंग, नूर हि का संग, नूर हि का रंग मेरा । नूर हि राता, नूर हि माता, नूर हि खाता दादू तेरा ॥ 220 ॥ सूक्ष्म सौंज अर्चा बन्दगी दादू नूरी दिल अरवाह का, तहाँ बसै माबूदं । तहँ बंदे की बंदगी, जहाँ रहै मौजूदं ॥ 221 ॥ दादू नूरी दिल अरवाह का, तहँ खालिक भरपूरं । आली नूर अल्लाह का, खिदमतगार हजूरं ॥ 222 ॥ दादू नूरी दिल अरवाह का, तहँ देख्या करतारं । तहँ सेवक सेवा करै, अनन्त कला रवि सारं ॥ 223 ॥ दादू नूरी दिल अरवाह का, तहाँ निरंजन वासं । तहँ जन तेरा एक पग, तेज पुंज प्रकाशं ॥ 224 ॥ दादू तेज कमल दिल नूर का, तहाँ राम रहमानं । तहँ कर सेवा बंदगी, जे तूँ चतुर सयानं ॥ 225 ॥ तहाँ हजूरी बंदगी, नूरी दिल में होइ । तहँ दादू सिजदा करै, जहाँ न देखै कोइ ॥ 226 ॥
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