भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 92, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4 दादू देही मांहि दोइ दिल, इक खाकी इक नूर। खाकी दिल सूझै नहीं, नूरी मंझि हजूर ॥ 227 ॥ नमाज सिजदा दादू हौज हजूरी दिल ही भीतरि, गुसल हमारा सारं । उजू साजि अलह के आगे, तहाँ नमाज गुजारं ॥ 228 ॥ दादू काया मसीत कर पंच जमाती, मन ही मुल्ला इमामं । आप अलेख इलाही आगे, तहँ सिजदा करे सलामं ॥ 229 ॥ दादू सब तन तसबी कहै करीमं, ऐसा करले जापं । रोजा एक दूर कर दूजा, कलमा आपै आपं ॥ 230 ॥ दादू आठों पहर अलह के आगै, इकटक राहिबा ध्यानं । आपै आप अर्श के ऊपर, जहाँ रहै रहमानं ॥ 231 ॥ दादू अट्ठे पहर इबादती, जीवण मरण निबाहि । साहिब दर सेवै खड़ा, दादू छाड़ि न जाहि ॥ 232 ॥ साधु महिमा महात्म अट्ठे पहर अर्श में, ऊभोई आहे । दादू पसे तिनके, अल्लह गाल्हाये ॥ 233 ॥ अट्ठे पहर अर्श में, बैठा पीरी पसन्नि । दादू पसे तिन्न के, जे दीदार लहन्नि ॥ 234 ॥ अट्ठे पहर अर्श में, जिन्हीं रूह रहन्नि । दादू पसे तिन्न के, गुझ्यूं गाल्हि कन्नि ॥ 235 ॥ अट्ठे पहर अर्श में, लुड़ींदा आहीन । दादू पसे तिन्न के, असां खबर दीन ॥ 236 ॥ अट्ठे पहर अर्श में, वजी जे गाह्रीन । दादू पसे तिन्न के, कितेई आहीन ॥ 237 ॥ रस प्रेम प्याला प्रेम प्याला नूर का, आशिक भर दीया । दादू दर दीदार में, मतवाला कीया ॥ 238 ॥

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