भारतकोश
दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा)

दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा)

महाकवि दण्डी द्वारा

स्रोत: दशकुमारचरितम् (सटीक - पूर्वपीठिका व मूल कथा) · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1968 (उद्गम)

DevanagariHindipublished474 पृष्ठ

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पृष्ठ 445

CC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri. Funding: MIDF अष्टमोच्छ्वासः ] व्याख्याद्वयोपेतम् । ४४५ (२६ अथ कर्णे जीर्णमब्रवम् 'धूर्तो मित्रवर्मा दुहितरि सम्यक्प्रतिपत्त्या मातरं विश्वास्य तन्मुखेन प्रत्याकृष्य बालकं जिघांसति । तत्प्रतिगत्य कुशलमस्य मद्वार्ता च देव्यै रहो निवेद्य पुनः कुमारः शार्दूलभक्षित इति प्रकाशमाक्रोशनं कार्यम् । स दुर्मतिरन्तःप्रीतो बहिर्दुःखं दर्शयन्देवीम- नुनेष्यति । पुनस्तया त्वन्मुखेन स वाच्यः- 'यदपेक्षया त्वन्मतमत्य- क्रमिष सोऽपि बालः पापेन मे परलोकमगात् । अद्य तु त्वंदादेशकारि- ण्येवाहम्' इति । स तथोक्तः प्रीति प्रतिपत्त्याभिपत्स्यति । पुनरनेन वत्सनाभनाम्ना महाविषेण संनीय तोयं तत्र मालां मज्जयित्वा तया स वक्षसि मुखे च हन्तव्यः । 'स एवायमसिप्रहारः पापीयसस्तव भवतु यद्यस्मि पतिव्रता' । पुनरनेनागदेन संगमितेऽम्भसि तां मालां मज्ज- (२९) जीर्णं वृद्धं नालीजंघमित्यर्थः । दुहितरि मंजुवादिन्याम् । सम्य- क्प्रतिपत्त्या अनुकंपया । प्रत्याकृष्य आनीय । तत् तस्मात् कारणात् । अस्य भास्करवर्मणः । रहो निर्जने । पुनः पश्चात् । आक्रोशनं क्रन्दनम् । त्वन्मुखेन त्वां सम्प्रेष्येत्यर्थः । स मित्रवर्मा । अत्यक्रमिषम् अतिक्रान्तवती । प्रपिपद्य प्राप्य । अभिपत्स्यते अनुग्रहीष्यति देवीमिति शेषः । वत्सनाभो विषभेदः । दारदो वत्स- नाभश्चेत्यमरः । संनीय मिश्रयित्वा । तया देव्या । स मित्रवर्मा । अगदेन ओष- धिना । सङ्गमिते मिश्रिते । स्वदुहित्रे मंजुवादिन्यै । तस्मिन् मित्रवर्मणि । तस्यां (२९) तत्पश्चात् हमने उस बूढ़े नालीजंघ के कान में कहा- 'वह कपटी मित्रवर्मा अपनी कन्या मंजुवादिनी के ऊपर प्रेम दरसा तथा उसके द्वारा माता को विश्वास दिलवा करके इस बालक को अपने समीप बुलाकर मार डालना चाहता है । अतः आप हमारा तथा इस बालक का कुशल समाचार लेकर देवी वसुन्धरा के समीप जायँ तथा वहाँ यह कह कर रोने लगें कि बालक को सिंह खा गया ।' इस बात पर दुराचारी मित्रवर्मा मन में मुदित होकर ऊपरी दुःख प्रकट करता हुआ महारानी को सान्त्वना देगा । तत्पश्चात् महारानी आपके द्वारा उस दुष्ट से यह कहला भेजे कि जिसके लिए मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी वह बालक ही मर गया, अब तो आप जो आज्ञा दें वही मैं करूँ । यह श्रवण कर वह अति हर्षित हो जायगा और महादेवी वसुन्धरा के समीप आवेगा । उस समय इस वत्सनाभ नामक महाविष को पानी में घोलकर उसमें पुष्पों की माला भिगो कर रखे रहें तथा उस मित्रवर्मा के आते ही उसकी छाती और मुख पर बार-बार उसी माला को प्रेम से मारें तथा कहें- 'यदि मैं पतिव्रता होऊँ तो मेरी माला की मार तुम्हारे लिए तलवार के Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu

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