भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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१५।१२ ] सुखवग्गो [ ९५ ( तस्माद्धि धीरं च प्राज्ञं च बहुश्रुतं च धुर्यशीलं व्रतवन्तमार्यम् । तं तादृशं सत्पुरुषं सुमेधसं भजेत नक्षत्रपथमिव चन्द्रमा ॥१२॥) अनुवाद—इसलिये धीर, प्राज्ञ, बहुश्रुत, उद्योगी, व्रती, आर्य एवं सुबुद्धि सत्पुरुषका वैसेही सेवन करे, जैसे चन्द्रमा नक्षत्र- पथका ( सेवन करता है ) । १५—सुखवर्ग समाप्त