भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

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१२० ] धम्मपद [ १९।१७ अनुवाद—अविद्वान् और मूढ़समान ( पुरुष, सिर्फ ) मौन होनेसे मुनि नहीं होता, जो पंडित कि तुलाकी भाँति पकड़कर, उत्तम (तत्त्व ) को ग्रहण कर, पापोंका परित्याग करता है, वह मुनि है, और उक्त प्रकारसे मुनि होता है। चूंकि वह दोनों लोकोंका मनन करता है, इसलिये वह मुनि कहा जाता है। जेतवन अरिय बाळिसिक २७०—न तेन अरियो होति येन पाणानि हिंसति । अहिंसा सब्बपाणानं अरियो'ति पवुच्चति ॥१५॥ ( न तेनाऽऽर्यो भवति येन प्राणान् हिनस्ति । अहिंसया सर्वप्राणानां आर्य इति प्रोच्यते ॥१५॥ ) अनुवाद—प्राणियोंको हनन करनेसे ( कोई ) आर्य नहीं होता, सभी प्राणियोंकी हिंसा न करनेसे ( उसे ) आर्य कहा जाता है। जेतवन बहुतसे शील-आदि-युक्त भिक्षु २७१-न सीलब्बतमत्तेन बाहुसच्चेन वा पन । अथवा समाधिलाभेन विविच्चसयनेन वा ॥१६॥ ( न शीलव्रतमात्रेण बाहुश्रुत्येन वा पुनः । अथवा समाधिलाभेन विविच्य शयनेन वा ॥१६॥ ) २७२-फुसामि नेक्खम्मसुखं अपुथुज्जनसेवितं । भिक्खू ! विस्सासमापादि अप्पत्तो आसवक्खयं ॥ १७॥