धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०—मग्गवग्गो जेतवन पाँच सौ भिक्षु २७३-मग्गानट्ठङ्गिको सेट्ठो सच्चानं चतुरो पदा । विरागो सेट्ठो धम्मानं द्विपदानञ्च चक्खुमा ॥१॥ ( मार्गाणामष्टांगिकः श्रेष्ठः सत्यानां चत्वारि पदानि । विरागः श्रेष्ठो धर्माणां द्विपदानां च चक्षुष्मान् ॥१॥ ) २७४-एसो'व मग्गो नत्थ'ञ्ञो दस्सनस्स विसुद्धिया । एतं हि तुम्हे पटिपज्जथ मारस्सेतं पमोहनं ॥२॥ ( एष वो मार्गो नाऽस्त्यन्यो दर्शनस्य विशुद्धये । एतं हि यूयं प्रतिपद्यध्वं मारस्यैष प्रमोहनः ॥२॥ ) अनुवाद—मार्गोंमें अष्टांगिक मार्ग श्रेष्ठ है, सत्योंमें चार पद (=चार आर्यसत्य ) श्रेष्ठ हैं, धर्मोंमें वैराग्य श्रेष्ठ है, द्विपदों (=मनुष्यों )में चक्षुष्मान् (=ज्ञाननेत्रधारी, बुद्ध ) श्रेष्ठ हैं। दर्शन (=ज्ञान )की विशुद्धिके लिये यही मार्ग है, दूसरा नहीं; ( भिक्षुओ !) इसीपर तुम आरूढ होओ, यही मारको मूर्छित करने वाला है । १२२ ]