धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०।५ ] मग्गवग्गो [ १२३ जेतवन पाँच सौ भिक्षु २७५-एतं हि तुम्हे पटिपन्ना दुक्खस्सन्तं करिस्सथ । अक्खातो वे मया मग्गो अञ्ञाय सल्लसन्थनं ॥३॥ ( एतं हि यूयं प्रतिपन्ना दुःखस्यान्तं करिष्यथ । आख्यातो वै मया मार्ग आज्ञाय शल्य-संस्थानम् ॥३॥ ) २७६-तुम्हेहि किच्चं आतप्पं अक्खातारो तथागता । पटिपन्ना पमोक्खन्ति झायिनो मारबन्धना ॥४॥ ( युष्माभिः कार्यं आतप्यं आख्यातारस्तथागताः । प्रतिपन्नाः प्रमोक्ष्यन्ते ध्यायिनो मारबन्धनात् ॥४॥ ) अनुवाद—इस (मार्ग) पर आरूढ हो तुम दुःखका अन्त कर सकोगे, (स्वयं) जानकर (राग आदिके विनाशमें) शल्य समान मार्गको मैंने उपदेश कर दिया । कार्यके लिए तुम्हें उद्योग करना है, तथागतों (=बुद्धों) का कार्य उपदेश कर देना है, (तदनुसार मार्गपर) आरूढ हो, ध्यानमें रत पुरुष) मारके बन्धनसे मुक्त हो जायेंगे । जेतवन पाँच सौ भिक्षु [ अनित्य-लक्षणम् ] २७७-सब्बे सङ्खारा अनिच्चा 'ति यदा पञ्ञाय पस्सति । अथ निब्बिन्दति दुक्खे, एस मग्गो विसुद्धिया ॥५॥ ( सर्वे संस्कारा अनित्या इति यदा प्रज्ञया पश्यति । अथ निर्बिन्दति दुःखानि, एष मार्गो विशुद्धये ॥ ५॥