भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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१२५ ] धम्मपदं [ २०।८ ────────────────────────────────────────── अनुवाद—सभी संस्कृत (=कृत, निर्मित, बनी) चीज़ें अनित्य हैं, यह जब प्रज्ञासे देखता है, तब सभी दुःखोंसे निर्वेद (=विराग) को प्राप्त होता है, यही मार्ग (चित्त-) शुद्धिका है। [ दुःख-लक्षणम् ] २७८—सब्बे सङ्खारा दुक्खा 'ति यदा पञ्ञाय पस्सति । अथ निब्बिन्दति दुक्खे, एस मग्गो विसुद्धिया ॥६॥ ( सर्वे संस्कारा दुःखा इति यदा प्रज्ञया पश्यति । अथ निर्विन्दति दुःखानि, एष मार्गो विशुद्धये ॥ ६ ॥) अनुवाद—सभी संस्कृत (चीजें) दुःखमय हैं ० । [ अनात्म-लक्षणम् ] २७९—सब्बे धम्मा अनत्ता 'ति यदा पञ्ञाय पस्सति । अथ निब्बिन्दति दुक्खे एस मग्गो विसुद्धिया ॥७॥ ( सर्वे धर्मा अनात्मान इति यदा प्रज्ञया पश्यति । अथ निर्विन्दति दुःखानि एष मार्गो विशुद्धये ॥ ७ ॥) अनुवाद—सभी धर्म (=पदार्थ) बिना आत्माके हैं, ० । जेतवन (योगी) तिस्स (थेर) २८०—उट्ठानकालम्हि अनुट्ठहानो युवा बली आलसियं उपेतो। संसन्नसङ्कप्पमनो कुसीतो पञ्ञाय मग्गं अलसो न विन्दति॥८॥