भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 136

२०१ ] मग्गवग्गो [ १२५ (उत्थानकालेऽनुत्तिष्ठन् युवा बली आलस्यमुपेतः । संसन्न-संकल्प-मनाः कुसीदः प्रज्ञया मार्गं अलसो न विन्दति ॥ ८ ॥ ) अनुवाद—जो उत्थान (=उद्योग) के समय उत्थान न करनेवाला, युवा और बली होकर (भी) आलस्यसे युक्त होता है, मनके संकल्पोको जिसने गिरा दिया है, और जो कुसीदी (=दीर्घसूत्री) है, वह आलसी (पुरुष) प्रज्ञाके मार्गको नहीं प्राप्त कर सकता। राजगृह (वेणुवन) (शुकर-प्रेत) २८१-वाचानुरक्खी मनसा सुसंवुतो कायेन च अकुसलं न कयिरा। एते तयो कम्मपथे विसोधये आराधये मग्गमिसिप्पवेदितं ॥६॥ (वाचाऽनुरक्षी मनसा सुसंवृतः कायेन चाऽकुशलं न कुर्यात् । एतान् त्रीन् कर्मपथान् विशोधयेत्, आराधयेत् मार्गं ऋषिप्रवेदितम् ॥ ९॥) अनुवाद—जो वाणीकी रक्षा करनेवाला, मनसे संयमी रहे, तथा कायासे पाप न करे; इन (मन, वचन, काय) तीनों कर्मपथोंकी शुद्धि करे, और ऋषि (=बुद्ध)के बतलाये धर्मका सेवन करे।

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद) · पृष्ठ 136, कुल 213 में से · BharatKosha