भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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१४० ] धम्मपदं [ २२।१४ (अभये च भयदर्शिनो भये चाऽभयदर्शिनः । मिथ्यादृष्टिसमादानाः सत्त्वा गच्छन्ति दुर्गतिम् ॥१२॥) अनुवाद—भयरहित (काम) में जो भय देखते हैं, और भय (के काम) में भयको नहीं देखते, वह झूठी धारणावाले० । जेतवन (तीर्थिक-शिष्य) ३१८—अवज्जे वज्जमतिनो वज्जे चावज्जदस्सिन्नो । मिच्छादिट्ठि० ॥१३॥ (अवद्ये वद्यमतयो वद्ये चाऽवद्यदर्शिनः । मिथ्यादृष्टि० ॥१३॥) अनुवाद—जो अदोषमें दोषबुद्धि रखनेवाले हैं, (और) दोषमें अदोष दृष्टि रखनेवाले, वह झूठी धारणावाले० । ३१९—वज्जञ्च वज्जतो ञत्वा अवज्जञ्च अवज्जतो । सम्मादिट्ठिसमादाना सत्ता गच्छन्ति सुग्गतिं ॥१४॥ (वद्यं* च वद्यतो ज्ञात्वाऽवद्यं चावद्यतः । सम्यग्दृष्टिसमादानाः सत्त्वा गच्छन्ति सुगतिम् ॥१४॥) अनुवाद—दोषको दोष जानकर और अदोषको अदोष जानकर, ठीक धारणावाले प्राणी सुगतिको प्राप्त होते हैं । २२—निरयवग्ग समाप्त *वद्य=वज्जं ।