भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

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२३।११ ] नागवग्गो [ १४५ अनुवाद—यदि परिपक्व (– बुद्धि ) बुद्धिमान् साथमें विहरनेवाला (= शिष्य ) सहचर मित्र मिले, तो सभी परिश्रयों (= विघ्नों) को हटाकर सचेत प्रसन्नचित्त हो उसके साथ विहार करे । ३२९-नो चे लभेथ निपकं सहायं सद्धिं चरं साधुविहारिधीरं । राजा 'व रट्ठं विजितं पहाय एको चरे मातङ्ग रञ्जेव नागो ॥१०॥ ( न चेत् लभेत निपकं सहायं सार्द्ध चरन्तं साधुविहारिणं धीरम् । राजेव राष्ट्रं विजितं प्रहाय, एकश्चरेत् मातंगोऽरण्य इव नागः ॥१०॥ ) अनुवाद—यदि परिपक्व, बुद्धिमान् साथमें विहरनेवाला सहचर मित्र न मिले, तो राजाकी भाँति पराजित राष्ट्रको छोड़ गजराज हाथीकी तरह अकेला विचरे । ३३०-एकस्स चरितं सेय्यो नत्थि बाले सहायता । एको चरे न च पापानि कयिरा अप्पोस्सुको मातङ्ग 'रञ्जे'व नागो ॥११॥ ( एकस्य चरितं श्रेयो नाऽस्ति बाले सहायता । एकश्चरेत् न च पापानि कुर्याद् अल्पोत्सुको मातंगोऽरण्य इव नागः ॥११॥ ) १०