धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४६ ] धम्मपद [ २३।१३ अनुवाद—अकेला विचरना उत्तम है, (किन्तु) मूढ़की मित्रता अच्छी नहीं, मातंगराज हाथीकी भांति अनासक्त हो अकेला विचरे और पाप न करे। हिमवत्-प्रदेश मार ३३१-अत्थम्हि जातम्हि सुखा सहाया तुट्ठी सुखा या इतरीतरेन । पुञ्ञं सुखं जीवितसंङ्खयम्हि सब्बस्स दुक्खस्स सुखं पहाणं ॥१२॥ (अर्थे जाते सुखाः सहायाः, तुष्टिः सुखा येतरेतरेण। पुण्यं सुखं जीवितसंक्षये सर्वस्य दुःखस्य सुखं प्रहाणम् ॥ १२॥) अनुवाद—काम पड़नेपर मित्र सुखद (लगते हैं), परस्पर सन्तोष हो (यह भी) सुखद (वस्तु) है, जीवनके क्षय होने पर (किया हुआ) पुण्य सुखद (होता है); सारे दुःखोंका विनाश (=अर्हत् होना) (यह सबसे अधिक) सुखद है। ३३२-सुखा मत्तेय्यता लोके अथो पेत्तेय्यता सुखा । सुखा सामञ्ञता लोके अथो ब्रह्मञ्ञता सुखा ॥१३॥ (सुखा मात्रीयता लोकेऽथ पित्रोयता सुखा। सुखा श्रमणता लोकेऽथ ब्राह्मणता सुखा ॥ १३॥) अनुवाद—लोकमें माताकी सेवा सुखकर है, और पिताकी सेवा