धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६।३२ ] ब्राह्मणवग्गो [ १८३ जेतवन चन्दाभ ( थेर ) ४१३–चन्दं'व विमलं सुद्धं विप्पसन्नमनाविलं । नन्दीभवपरिक्खीणं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥३१॥ ( चन्द्रमिव विमलं शुद्धं विप्रसन्नमनाविलम् । नन्दीभवपरीक्षीaction? नन्दीभवपरीक्षीणं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३१॥ ) अनुवाद—जो चन्द्रमाकी भाँति विमल, शुद्ध, स्वच्छ=अनाविल है, ( तथा जिसकी ) सभी जन्मोंकी तृष्णा नष्ट हो गई है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ । कुण्डिया ( कोलिय ) सीवलि ( थेर ) ४१४–यो इमं पळिपथं दुग्गं संसारं मोहमच्चगा । तिण्णो पारगतो झायी अनेजो अकथंकथी । अनुपादाय निब्बुतो तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥३२॥ ( य इमं प्रतिपथं दुर्गं संसारं मोहमत्यगात् । तीर्णः पारगतो ध्याय्यनेजोऽकथंकथी । अनुपादाय निर्वृतः तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३२॥ ) अनुवाद—जिसने इस दुर्गम संसार, (=जन्म मरण )के चक्करमें डालने- वाले मोह( रूपी ) उलटे मार्गको त्याग दिया, जो ( संसारसे ) पारंगत, ध्यानी तथा तीर्ण (=तर गया ) है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।